ISKCON रथ यात्रा न्यूयॉर्क: 50 साल की भक्ति और उत्सव
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ISKCON रथ यात्रा न्यूयॉर्क: 50 साल की भक्ति और उत्सव

📅 13 जून 2026 📍 न्यूयॉर्क सिटी ✍️ Trisha Mukherjee

न्यूयॉर्क के लोग जो निक्स बास्केटबॉल टीम के जश्न और वर्ल्ड कप के मैच देखने आए थे, उन्हें शनिवार (13 जून) को एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला। मैनहट्टन की फिफ्थ एवेन्यू पर रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजी तीन विशाल रथ और हज़ारों की संख्या में गाते-बजाते भक्त — यह थी ISKCON (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित ऐतिहासिक रथ यात्रा

🎉 50 साल का जश्न: यह रथ यात्रा ISKCON की पहली रथ यात्रा (1976) की 50वीं वर्षगांठ थी। आयोजकों के अनुसार, इसमें 25,000 से ज़्यादा भक्त शामिल हुए।
25,000+
भक्त शामिल
50
साल की वर्षगांठ
25 फीट
रथ की ऊंचाई
$160K
खर्च (दान से)
400+
स्वयंसेवक
80+
देशों में ISKCON

🕉️ ISKCON क्या है?

ISKCON यानी इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस — इसे आम तौर पर "हरे कृष्णा आंदोलन" भी कहा जाता है। इसके कुछ मुख्य बिंदु:

📅 रथ यात्रा का दिन — समय-सारणी

🌅 सुबह 10:00 बजे
भिक्षु (monks) ने देवताओं की मूर्तियों और रथों को तैयार किया। भक्त धूप से बचने के लिए छाया में जुटे। सैकड़ों लोग नाचते हुए "हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा, हरे हरे" का जाप करने लगे।
🕉️ सुबह 11:00 बजे
भगवा वस्त्र पहने भिक्षुओं ने आशीर्वाद दिया। भक्तों ने रथों से बंधी रस्सियां पकड़ीं। एक पुजारी ने शंख बजाया और रथ खिंचने शुरू हुए। फिफ्थ एवेन्यू पर रंगीन कपड़े, ढोल और मंजीरे की धुन से माहौल भक्तिमय हो गया।
🌞 दोपहर
रथ 41वीं स्ट्रीट से निकलकर फिफ्थ एवेन्यू पर आगे बढ़े। राहगीर हैरान और खुश होकर देखते रहे। कई पर्यटकों ने तस्वीरें लीं।
🌳 शाम 4 बजे (लगभग)
चार घंटे की यात्रा के बाद रथ वाशिंगटन स्क्वायर पार्क पहुंचे। यहां भक्तों के लिए शाकाहारी भोजन, हenna, फेस पेंटिंग और भिक्षुओं से सवाल-जवाब के स्टॉल लगे।

🪷 रथों में कौन थे?

तीन रथों में तीन मूर्तियां थीं:

  • 🪷 कृष्ण (Krishna) — भगवान विष्णु के अवतार, ISKCON के मुख्य देवता
  • 🪷 बलराम (Balarama) — कृष्ण के बड़े भाई
  • 🪷 सुभद्रा (Subhadra) — कृष्ण की छोटी बहन

यह परंपरा भारत के पुरी, ओडिशा से शुरू हुई, जहां हर साल लाखों लोग रथ यात्रा में शामिल होते हैं।

👥 लोगों की प्रतिक्रिया

पैट्रिक ऑर्नेलस (Patrick Ornelas)
📍 साल्ट लेक सिटी से पर्यटक

हम अपने शहर में ऐसा कुछ नहीं देखते। यह बहुत अद्भुत और अनोखा अनुभव है।

ब्रैड ब्राउनिंग (Brad Browning)
📍 अपस्टेट न्यूयॉर्क से — ब्राज़ील vs मोरक्को वर्ल्ड कप मैच देखने आए

मैं हरे कृष्णा के बारे में कुछ नहीं जानता, लेकिन एक भक्त ने मुझे ISKCON की पैम्फलेट दी। शायद मैं इसे पढ़ूंगा।

पायल मजूमदार (Payal Mazumdar)
📍 15 साल की, ब्रुकलिन ISKCON मंदिर में भगवद गीता की कक्षाएं लेती हैं

मुझे बहुत ज़्यादा ओवरथिंकिंग की समस्या थी। ISKCON समुदाय और दर्शन के ज़रिए, ऐसा लगा जैसे मेरे साथ कोई सपोर्ट सिस्टम है।

सर्वोपम दास (Sarvopama Das)
📍 79 साल, शिकागो से — पहली रथ यात्रा (1976) में तरबूज परोसने वाले स्वयंसेवक

50 साल पहले जब हम कर्म की बात करते थे, तो लोग हैरान हो जाते थे। हम सोचते थे कि हम कूल हैं। अब 'कर्म' शब्द डिक्शनरी में है!

🏀 ISKCON और निक्स — एक अनोखी जोड़ी

ISKCON ने इस साल न्यूयॉर्क निक्स बास्केटबॉल टीम को भी सपोर्ट किया। मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर निक्स फैंस के साथ कीर्तन करने का वीडियो वायरल हुआ।

🏀 महामंत्र (Mahamantra) — ISKCON भिक्षु जो वायरल वीडियो में थे, रथ यात्रा के बाद निक्स स्टाइल में हरे कृष्णा टी-शर्ट बेच रहे थे। उन्होंने कहा: "मैं निक्स की जीत के लिए उत्साहित हूं, लेकिन सबसे ज़्यादा खुशी लोगों के साथ नाचने और गाने में है।"

💰 आयोजन की तैयारी और खर्च

🏛️ ISKCON का इतिहास — न्यूयॉर्क से दुनिया तक

1966 — शुरुआत

A. C. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद भारत से अमेरिका आए। उनका मिशन था — पश्चिम में कृष्ण भावनामृत फैलाना। काउंटरकल्चर आंदोलन के दौरान उन्होंने कुछ अनुयायी बनाए, जो नौकरी और परिवार छोड़कर आश्रम में रहने लगे।

1976 — पहली रथ यात्रा और ट्रम्प का योगदान

जब प्रभुपाद ने मैनहट्टन में रथ यात्रा का विचार किया, तो फिफ्थ एवेन्यू के पास ज़मीन नहीं मिल रही थी। तभी उन्होंने उस समय के नए प्रॉपर्टी मालिक डोनाल्ड ट्रम्प से मदद मांगी। ट्रम्प ने अपनी ज़मीन रथ बनाने के लिए दी, और इस तरह पहली रथ यात्रा संभव हुई।

1990 के दशक — बदलाव

ISKCON ने नया मॉडल अपनाया — अब भक्त आश्रम में नहीं रहते, बल्कि अपनी ज़िंदगी जीते हुए ISKCON कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। यह मॉडल आज भी लोकप्रिय है।

🎯 ISKCON का लक्ष्य

🌍 आउटरीच मिशन: ISKCON उपाध्यक्ष आदित्य देवी दासी ने कहा — "हमारा लक्ष्य है कि उत्तर अमेरिका की लगभग 3% आबादी इन त्योहारों में आए, भक्तों की संगति का आनंद ले और sanctified भोजन खाए।"

ब्रुकलिन का ISKCON मंदिर में 40 पूर्णकालिक भिक्षु रहते हैं और 500 नियमित भक्त सेवाओं में आते हैं। सालाना रथ यात्रा सबसे बड़ा कार्यक्रम है।

🌎 आगे क्या?

रथ यात्रा के बाद, तीनों रथ अमेरिका के अन्य शहरों में भेजे जाएंगे — जहां वे अपनी सालाना रथ यात्राओं में शामिल होंगे। ISKCON आयोजकों की उम्मीद है कि हर पहिए के घूमने से नए भक्त जुड़ेंगे

हर पहिए के साथ एक नई आत्मा जुड़े,
हर कीर्तन के साथ एक नया दिल जी उठे।

हरे कृष्णा!

🎯 निष्कर्ष

न्यूयॉर्क की यह रथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि भक्ति, सांस्कृतिक विविधता और सामुदायिक एकता का जश्न था। 50 साल पहले एक छोटे से आंदोलन ने जो शुरुआत की, वो आज दुनिया भर में लाखों लोगों को जोड़ रही है। चाहे वो बास्केटबॉल फैन हो या वर्ल्ड कप पर्यटक, 15 साल की छात्रा हो या 79 साल का वेटरन भक्त — सभी को इस रंगीन यात्रा में अपनी जगह मिली।

🕉️ हरे कृष्णा, हरे कृष्णा,
कृष्णा कृष्णा, हरे हरे 🕉️